सुनहरा लोटा


सोने का लोटा | हिंदी  कहानी  | Moral Stories in Hindi | Hindi Kahaniya

लखीपुर में एक किसान रहता था । उसकी एक ही बेटी थी, नाम था चंदा । चंदा बहुत ही सुंदर, नेक और गुणी लड़की थी । एक दिन वह जंगल से लकड़ियां चुनकर लौट रही थी, तो मार्ग में नगर सेठ के सबसे छोटे पुत्र भानुगुप्त की नजर उस पर पड़ी । वह उस समय व्यापार के सिलसिले में परदेश से लौट रहा था ।


चंदा को देखकर, वह उसके रूप पर मोहित हो गया। उसने मन ही मन उससे विवाह करने का निश्चय कर लिया। कुछ दिनों के पश्चात् चंदा से उसका विवाह हो गया । चंदा दिन-रात अपने सास-ससुर एवं जेठ-जेठानियों की सेवा करती, उन्हें खुश रखने का प्रयास करती, पर उसके गरीब परिवार के कारण वे उसे पसंद नहीं करते थे । उसकी दोनों जेठानियाँ उसके रूप और गुणों के कारण उससे जलती थीं । सेठ के बडे दोनों पुत्र आलसी और कामचोर थे । सारे कारोबार का जिम्मा भानुगुप्त पर ही था । कुछ दिनों के पश्चात् उसे व्यापार के सिलसिले में - फिर से बाहर जाना था । रोती-बिलखती चंदा को जल्दी लौटकर आने का आश्वासन देकर, वह चला गया।

उसके जाते ही चंदा की जेठानियों की तो मौज आ गई । वे चंदा को तरह-तरह से सताती । काम तो सारा वह करती, पर श्रेय वे दोनों स्वयं ले लेती । उसके बारे में उलटी-सीधी बातें कहकर सास-ससुर के कान भर देतीं । इससे सेठ-सेठानी भी. चंदा से नाराज रहने लगे।

एक दिन किसी बात पर क्रोधित होकर, उन्होंने उसे घर से निकाल दिया । घर से निकलने पर रोती हुई चंदा ने पीहर जाने का विचार इस भय से त्याग दिया कि उसके वहाँ जाने से पिता की बदनामी होगी। लिहाजा वह घने जंगल की ओर चल पड़ी । चलते-चलते शाम ढल गई । भूख-प्यास से उसका बुरा हाल था । तभी दूर उसको एक दीए की टिमटिमाती रोशनी नजर आई । प्रसन्न होकर वह उसी ओर चल दी । वहाँ पहुँचकर वह क्या देखती है कि एक छोटी-सी झोंपड़ी में दीए के प्रकाश में एक बुढ़िया चरखा कात रही है । बुढ़िया की अवस्था को देखकर चंदा की दया आ गई।

वह उससे बोली-"लाइए मां जी, आप थक गई होंगी । अब चरखा में कात देती हूँ।" बुढ़िया यह सुनकर बड़ी प्रसन्न हुई । बोली"ठीक है बेटी, अब चरखा तुम कातो । एक बात याद रखना, जब तक मैं लौटकर न आऊँ, चरखा कातना बंद मत करना ।" यह कहकर वह चली/गई और चंदा चरखा कातने बैठ गई । थकी होने पर भी सारी रात वह चरखा कातती रही । उसके हाथ दर्द करने लगे, लेकिन बुढ़िया नहीं आई ।

सुबह पौ फटते ही बुढ़िया आ पहुँची । चंदा को कातते देखकर खश हो गई । फिर उसने उसे खिलाया-पिलाया और पहनने के लिए ले कपड़े दिये । जब चंदा ने उसे अपनी कहानी सुनाई, तो उसका टिल पसीज गया । उसने अपने झोले में से एक सोने का लोटा निकाला । उसे चंदा को देकर बोली-"तुम बहुत ही दयालु लड़की हो । यह लोटा अपने पास रखो । मुसीबत में तुम्हारी मदद करेगा । जरूरत पडने पर भी इसे मत बेचना । अब तुम यहाँ से पूरब दिशा की ओर चली जाओ । भगवान ने चाहा, तो तुम्हारी सारी परेशानियाँ दर हो जायेंगी।" लोटा ले बुढ़िया को प्रणाम कर चंदा, पूर्व दिशा की ओर चल दी।

दो दिन की थकान भरी लम्बी यात्रा के बाद उसने एक नगर में प्रवेश किया । भूखी-प्यासी होने के कारण वह एक घर के सामने चक्कर खाकर गिर पड़ी। उस घर में एक वृद्ध पति-पत्नी रहते थे । जब उन्होंने अपने घर के बाहर एक स्त्री को बेहोश पड़े देखा, तो वे उसे उठाकर अंदर ले गए । उसकी देखभाल करने लगे । दो-तीन दिनों में ही चंदा स्वस्थ हो गई । इन तीन दिनों में ही उसने महसूस किया कि उन पति पत्नी के साथ-साथ, नगर के सभी लोगों के चेहरे पर उदासी बनी रहती है

जब उसने इस उदासी का कारण पूछा, तो दुखी होते हुए वृद्ध बोले-"क्या बताऊँ बेटी, हमारा राज्य पहले बड़ा खुशहाल था । राजा भी बड़े स्वस्थ और राजकाज पर पूरा ध्यान देने वाले थे । एक ही दुःख था कि राजा की कोई संतान नहीं थी। रानी के बहुत जोर देने पर संतान प्राप्ति के लिए राजा ने दूसरा विवाह कर लिया । संतान तो तब भी नहीं हुई, हमारे राजा निरंतर बीमार रहने लगे । दूर-दूर से वैद्य इलाज करने आए, पर राजा को ठीक नहीं कर सके । उधर राजकोष में भी निरंतर चोरी होने के कारण देश का बहुमूल्य सामान नष्ट हो रहा है । सैनिक -चोर का पता ही नहीं लगा पा रहे हैं । न मालूम कौन-सी आफत हमारे देश पर मंडरा रही है ? इसलिए हर व्यक्ति उदास रहता है ।"

वृद्ध की बात सुनकर चंदा भी परेशान हो गई । वह काफी देर सोचती रही । फिर सोचते-सोचते सो गई । सपने में उसे लगा कि सुनहरा लोटा उसे पुकार रहा है । वह लोटे के पास गई, तो उसमें से आवाज आई-"चंदा, तुम तुरंत वैद्य बनकर राजा वीरसेन के पास , जाओ। उन्हें खाने में रोज थोड़ा-थोड़ा जहर दिया जा रहा है। इस कारण वह अस्वस्थ रहते हैं । तुम अपनी चतुराई से इस राज्य की परेशानियाँ दूर करो, तो तुम्हारी मुसीबतें भी दूर होंगी।" यह कहकर लोटा चुप हो गया । चंदा हड़बड़ाकर उठ बैठी । सारी बातें याद कर, वह आश्चर्य से भर उठी ।

सुबह वह तैयार होकर, राजभवन की ओर चल पड़ी । द्वारपाल द्वारा उसका संदेश सुनकर, बड़ी रानी ने उसे अंदर बुलाया । बीमार राजा अपने कमरे में एक पलंग पर लेटे हुए थे । उनकी नाड़ी देखकर, चंदा रानी से बोली-"महारानी, महाराज अवश्य ठीक हो सकते हैं । आपको मेरी एक शर्त माननी होगी । राजा केवल वही भोजन करेंगे जो 'मैं पकाऊँगी । उसके अतिरिक्त वह कुछ नहीं खायेंगे।" रानी तो राजा को स्वस्थ देखना चाहती थी, उसने झट चंदा की शर्त मंजूर कर ली। अब चंदा वहीं राजमहल में रहने लगी । राजा को अपने हाथों से बनाकर खाना खिलाती। सोने के लोटे में पानी पिलाती । धीरे-धीरे विषहीन भोजन करने और चमत्कारी लोटे का पानी पीने के कारण राजा स्वस्थ होने लगे।

एक दिन जब चंदा अपने कमरे में सो रही थी, तभी उसे एक सपना आया कि सुनहरा लोटा उससे कह रहा है-'चंदा, सबके सोने पर भी जो जागता रहे, वही बुद्धिमान होता है ।' तभी चंदा की आँख खुल गई । वह लोटे की कही हुई बात का अर्थ निकालने की कोशिश करने लगी

अगले दिन सबके सो जाने के पश्चात् भी चंदा जागती रही । आधी रात बीत जाने के बाद अपने कमरे के बाहर पदचापों की आवाज सुनी । वह तुरंत ही सजग हो गई । उसके बाद उसने जो देखा, उससे उसके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा । अगले दिन वह राजा और बड़ी रानी से बोली-"महाराज, आज आधी रात के पश्चात् मैं आपको एक बड़ा विचित्र घटना दिखाऊँगी । पर तब तक इस बात की भनक किसी को नहीं पड़नी चाहिए ।" राजा-रानी मान गए । जब रात आई, तो वे दोनों छिपकर चंदा के कक्ष में बैठ गए । आधी रात बीत जाने के बाद कक्ष के बाहर पदचापों का स्वर सुनकर उन्होंने खिड़की से बाहर झांककर देखा, तो उनके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा । उन्होंने देखा कि छोटी रानी अपनी दो दासियों के साथ गलियारे में से होकर जा रही थी । दासियों के सिरों पर दो बड़े-बड़े टोकरे रखे हुए थे । 'हो न हो इसमें राजकोष का धन है ।' -राजा ने मन ही मन सोचा और वे तीनों छिपकर छोटी रानी का पीछा करने लगे।

थोड़ी देर बाद रानी अपनी दासियों सहित महल की छत की ओर जाने वाली सीढ़ियों की ओर बढ़ गई। अंतिम सीढ़ी पर पहुँचने के बाद वह गायब हो गई । राजा की समझ में कुछ नहीं आ रहा था । चंदा उन दोनों को लेकर अंतिम सीढ़ी पर पहुंची और वहाँ दीवार में जड़ी हुई एक कील को दबा दिया । तुरन्त वहाँ से दीवार हट गई । एक रास्ता नजर आने लगा जो कि एक सुरंग में खुलता था । वे लोग उस सुरंग में प्रविष्ट हुए । छोटी रानी का कहीं पता नहीं चला । राजा यह देखकर चकित रह गए कि सुरंग का अंतिम छोर शत्रु देश में खुल रहा था । अब राजा को राजकोष से चोरी होने वाले धन का कुछ-कुछ पदा चल गया ता । वे लोग वापस लौटकर चैन से सो गए।

दूसरे दिन छोटी रानी को अपने सम्मुख बुलवाकर राजा ने कड़ाई से पूछा, तो भय से काँपते हुए उसने सब कुछ बता दिया । उसने बताया कि वह शत्रु देश की गुप्तचर है । अपने सुंदर रूप के मोहजाल में फंसाकर उसने राजा से विवाह कर लिया । धीरे-धीरे महल के 'कर्मचारियों को अपनी ओर मिलाकर वह खजाना अपने देश पहुँचाने लगी । राजा को विष देने की बात भी उसने स्वीकार कर ली । राजा के भोजन में वही विष मिलाती थी, ताकि धीरे-धीरे अस्वस्थ होकर राजा' मृत्यु को प्राप्त हो जाएं और शत्रु राजा आसानी से इस देश पर अधिकार जमा लें।

विष की बात सुनकर, राजा को बड़ा विस्मय हुआ । पर जब चंदा ने कहा-"हाँ महाराज, आपको खाने में विष दिया जाता था । इसलिए मैंने आपको अपने हाथों से बना खाना खिलाना प्रारम्भ किया ।" सारी बात सुनकर राजा ने छोटी रानी और उससे मिले हुए सभी सेवकों को कठोर दंड दिया ।

जब राजा को यह पता लगा कि चंदा एक बेसहारा स्त्री है, तो उन्होंने उसे अपनी पुत्री की तरह मानकर राजमहल में ही स्थान दे दिया । चंदा वहाँ सुखपूर्वक रहने लगी । उधर विदेश में बसे भानुगुप्त । को व्यापार में इतना अधिक घाटा हो गया कि वह एकदम कंगाल हो गया । किसी तरह बड़ी मुश्किल से घर पहुँच पाया । यह देखकर उसे गहरा सदमा लगा कि उसकी अनुपस्थिति में उसके दोनों भाइयों ने पिता की सारी सम्पत्ति हड़प ली । उसके माता-पिता बड़े कष्ट के दिन व्यतीत कर रहे थे । चंदा का कहीं पता नहीं था । शोकाकुल होकर उसने चंदा को ढूंढ़ने का निश्चय किया ।

उसके माता-पिता भी उसके साथ चल पड़े । ढूंढते-ढूँढते वे लोग उसी नगर में आ पहुँचे । एक दिन भूख से व्याकुल होकर वे राजभवन । के बाहर भिखारियों की पंक्ति में जा खड़े हुए । महारानी के साथ भिखारियों में भोजन बांटती हुई चंदा ने अपने पति और सास-ससुर को फटेहाल अवस्था में देखा । दौड़कर वह उनके पास पहुँची । चंदा को पहचानकर भानुगुप्त के हर्ष का ठिकाना नहीं रहा ।

सेठ-सेठानी भी चंदा से अपने किए हुए व्यवहार की क्षमा माँगने लगे । सबको लेकर चंदा राजा के पास आई । वह भी बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने भानुगुप्त और उसके पिता को राजभवन में ही अच्छी नौकरी देकर रहने के लिए एक अलग भवन दे दिया ।


Gold Pot Story | Moral Stories in English 


There used to be a farmer in Lakhipur. He had only one daughter, named Chanda. Chanda was a very beautiful, noble and virtuous girl. One day she was returning from the forest after picking wood, then Bhanugupta, the youngest son of Nagar Seth, en route on her. He was returning from abroad at that time in connection with trade.


Seeing Chanda, he was fascinated by her look. He decided to marry her in his mind. He was married to Chanda a few days later. Chanda served her mother-in-law and brother-in-law day and night, trying to keep them happy, but they did not like her because of her poor family. Both his daughters were jealous of him because of his form and qualities. Both the elder sons of Seth were lazy and doodle. The entire business was handled by Bhanugupta. After a few days he was to go out again in connection with the business. Promising Chanda to return early, he leaves.


As soon as he left, the daughters of Chanda had fun. They harassed Chanda in many ways. She would do all the work, but both of them would take the credit themselves. Saying reverse things about her, she would fill her mother-in-law's ears. Seth-Seethani also. Started being angry with Chanda.


One day angry at something, they expelled him from the house. On leaving the house, the weeping Chanda abandoned the idea of ​​going to Pihar with the fear that her going there would bring disgrace to the father. So she walked towards the dense forest. As the evening progressed, the evening progressed. He was in a bad condition due to hunger and thirst. Just then, he saw the twinkling lights of a lamp. Pleased, she went to that side. After reaching there, what she sees is that in the light of a lamp in a small hut there is an old spinning wheel. Chanda felt pity on seeing the old age.


She said to him- "Come mother, you must be tired. Now I spin in the spinning wheel." The old lady was very happy to hear this. He said, "Okay daughter, now you spin the spinning wheel. Remember one thing, don't stop spinning the spinning wheel till I come back." Saying this, she left and sat down to spin Chanda Charkha. Despite being tired, she kept spinning the charkha all night. His hands started hurting, but the old lady did not come.


The old lady arrived as soon as dawn broke. Chanda was pleased to see the slaughter. Then he fed and fed him and gave him clothes to wear. When Chanda told her her story, her til was extinguished. He took out a lotus of gold from his bag. Giving her to Chanda, she said- "You are very kind girl. Keep this lota with you. It will help you in trouble. Do not sell it even if you need it. Now you go from here to the east direction. God willing, then All your troubles will be done. " After taking the lotus, the old lady bowed and went towards the east.


After a long journey of two days, he entered a city. Being hungry and thirsty, she fell in front of a house. There lived an old husband and wife in that house. When they saw a woman lying unconscious outside their house, they took her inside. Started taking care of him. In two or three days, the donation became healthy. Within these three days, he realized that along with those husband and wife, sadness persists on the faces of all the people of the city.


When he asked the reason for this sadness, the old man said sadly- "What to tell, daughter, our kingdom was very happy at first. The king was also very healthy and full of attention to the kingdom. The only sadness was that the king had no children." At the insistence of the queen, the king got a second marriage to get a child. Even though the child did not happen, our king continued to remain ill. Vaidyas from far and wide came to cure, but could not cure the king. On the other hand, due to the continuous theft in the treasury, the valuable goods of the country are being destroyed. The soldiers are not able to detect the chor. Do not know which disaster is raging on our country? Therefore every person remains depressed. "


Chanda also got upset after listening to the old man. She kept thinking for a long time. Then while thinking, she fell asleep. In the dream, he felt that the golden lota was calling him. When she went to Lotte, a voice came out of her - "Chanda, you become a physician immediately and go to King Veerasen. He is being poisoned a little bit every day by eating. That is why he remains unwell. Eliminate the troubles of this state, then your troubles will also be removed. " Lota fell silent saying this. Chanda got up in a hurry. Remembering all the things, she was filled with surprise.



In the morning she got ready and walked towards Raj Bhavan. Hearing her message by the gatekeeper, the elder queen called her inside. The ailing king was lying on a bed in his room. Seeing his pulse, Chanda said to the queen- "Your Majesty, Maharaja must be fine. You have to accept one of my conditions. The king will eat only the food that 'I will cook. Apart from that he will not eat anything." The queen wanted to see the king healthy, she accepted the condition of quick donations. Now Chanda started living in the palace there. Used to cook the king with his hands and feed him. Used to drink water in a gold pot. Slowly, the king started getting healthy due to eating poisonous food and drinking miraculous lotus water.

One day while Chanda was sleeping in her room, then she had a dream that the golden lota is saying to her - 'Chanda, one who is awake even when everyone is asleep, he is wise.' Then Chanda's eyes opened. She started trying to make sense of what Lotte had said.


The next day, after everyone fell asleep, Chanda kept awake. After midnight, he heard footsteps outside his room. She immediately became aware. From what he saw after that, he was not surprised. The next day she said to the king and the elder queen- "Maharaj, after midnight today I will show you a very strange incident. But till then no one should be aware of this." The king and queen agreed. When night came, they both hid and sat in Chanda's room. After midnight, when he saw the sound of footsteps outside the room and peeped out of the window, he was not surprised. He saw that the little queen was going through the corridor with her two maids. Two large baskets were placed at the ends of the maidens. "There is no treasure in it." Raja thought in his mind and all three of them started hiding and chasing the little queen.


After a while the queen, along with her maids, moved up the stairs leading to the roof of the palace. She disappeared after reaching the final ladder. The king could not understand anything. Chanda took the two of them to the last step and pressed a nail studded into the wall there. Immediately the wall was removed from there. A path was visible that opened into a tunnel. They entered the tunnel. The little queen was not known anywhere. The king was surprised to see that the last end of the tunnel was opening in the enemy country. Now the king got some money from the treasury. They returned and slept peacefully.


The next day, when the king asked the little queen in front of him, the king asked sternly, he trembled with fear and told everything. He told that he is the intelligence of the enemy country. Fascinated by the beauty of his beautiful form, he married the king. Gradually, she joined the palace's staff and took the treasure to her country. He also accepted the matter of poisoning the king. The same poison was added to the food of the king, so that by gradually becoming unhealthy, the king would 'die and the enemy king should easily take possession of this country.


Hearing the poison, the king was in awe. But when Chanda said- "Yes Maharaj, you were given poison in food. That is why I started feeding you food made with my own hands." Hearing the whole thing, the king punished the younger queen and all the servants who met her.


When the king came to know that Chanda was a destitute woman, he treated her as his daughter and gave him a place in the palace. Chanda started living there happily. Bhanugupta settled abroad. The business incurred such a huge loss that it became completely bankrupt. Somehow, I could reach home with great difficulty. He was shocked to see that in his absence both his brothers took away all the wealth of the father. His parents were spending a day of great distress. Chanda was not known anywhere. Shocked, he decided to find Chanda.


His parents also followed him. Searching, they came to the same city. One day they become distraught with hunger and enter the palace. Began to row in the line of beggars. Sharing food with the Queen among the beggars, Chanda saw her husband and mother-in-law in a shambles. She ran to him. By recognizing Chanda, Bhanugupta's happiness did not stop.



Seth-Seethani also started apologizing to Chanda for his behavior. Chanda came to the king with everyone. He was also very happy. He gave Bhanugupta and his father a separate building to live in Raj Bhavan by giving them a good job.


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