Hindi Kahaniya :  हिंदी कहानियां – परोपकारी राजकुमार


परोपकारी राजकुमार | हिंदी  कहानी  | Moral Stories in Hindi | Hindi Kahaniya


यूनान राज्य की राजधानी है - एथेंस। एथेंस के बीचोंबीच एक सुनहरी प्रतिमा लगी हुई थी। उस प्रतिमा पर हीरे-मोती और सोने-चाँदी जड़े थे। यह प्रतिमा यूनान के राजकुमार की थी।


एक दिन यूनान के दो मंत्री वहाँ से गुज़र रहे थे। प्रतिमा की ओर देखकर एक ने दूसरे से कहा, “सचमुच इतनी सुंदर प्रतिमा और कहीं नहीं देखी है।" कलाकार ने इसे इतना सजीव बनाया है, मानो यह अभी बोल उठेगी।

प्रतिमा उनकी बातें सुनकर मुस्कुराई। तभी एक बच्चे की उँगली पकड़े उसकी माँ सामने से निकली। बच्चा रो रहा था। माँ ने कहा, “ज़रा उस प्रतिमा को देखो। राजकुमार कैसे मुस्कुरा रहा है? तुम्हें भी सदा ऐसे ही मुस्कुराते रहना चाहिए। पर तुम तो बात-बात पर रोते हो।"

थाड़ी देर में एक चिडिया कहीं से उड़ती हुई आई और उस प्रतिमा पर जा बैठी वह उड़ते-उड़ते थक गई थी। चिड़िया अभी सुस्ता ही रही थी कि आसमान से बूंदें गिरने लगीं। चिड़िया बोली, “अरे! मैं तो यहाँ आराम करने आई थी, पर यहाँ तो सिर ढकने की भी जगह नहीं। ऐसी मूर्ति का क्या फ़ायदा जो किसी को भीगने से भी न बचा पाए।

यह सुनकर प्रतिमा बोल उठी, “मेरे दोनों पाँवों के बीच कुछ ढकी जगह है। तम वहाँ बैठ जाओ।"

Hindi Kahaniya :  हिंदी कहानियां – परोपकारी राजकुमार

चिड़िया वहाँ जा बैठी और भीगने से बच गई। रात में राजकुमार ने बताया, “मैं यहाँ का राजकुमार था। मैं हमेशा सबकी मदद करता था। दूसरों की मदद करने में मुझे आनंद आता था। अब मैं जीवित नहीं रहा। चाहकर भी खुद किसी के काम नहीं आ सकता। क्या तुम मेरी मदद करोगी?”

चिड़िया बोली - “तुम्हारा क्या काम है?"

राजकुमार बोला, “चिड़िया, चिड़िया! तुम राजमहल में जाओ! वहाँ राजमहल के पास सेवकों के कमरे हैं। उनमें से एक छोटा-सा कमरा भी है। वहाँ एक बीमार लड़का भूख-प्यास से व्याकुल है। उसकी माँ बहुत गरीब है। उसके पास उसे खिलाने के  लिए कुछ भी नहीं है। दवा के लिए भी पैसे नहीं हैं। तुम मेरी आँखों में से कुछ हीरे निकालकर उन्हें दे आओ।

चिडिया बोली, “नहीं, नहीं! मैं उस लड़के के लिए कभी नहीं जाऊँगी। पिछले साल जब मैं नदी पार कर रही थी तो उस शैतान ने मुझे पत्थर मारे थे।"

चिडिया की बात सुनकर राजकुमार उदास हो गया। राजकुमार को दुखी देख चिडिया ने उसकी बात मान ली। उसने अपनी चोंच से कुरेदकर कुछ हीरे निकाल लिए। उड़ती हुई वह राजमहल के पास गई और वे हीरे सेवक के उस छोटे से कमरे में गिरा दिए। अपने कमरे में चमकते हीरे पाकर औरत बहुत प्रसन्न हुई और अपने बेटे के लिए दवा और खाना लेने बाहर चली गई।

चिड़िया वापस लौटी। रास्ते में उसने एक गाँव देखा। वहाँ बहुत गरीबी थी। उसने आकर राजकुमार को उस गाँव का हाल सुनाया। राजकुमार बोला, “मेरे वस्त्र सोने की परतों से बने हैं। इन परतों को उतारकर गाँव के घरों में डाल आओ। बेचारे कुछ दिन तो पेट भर खा लेंगे।"

चिड़िया ने सोने की एक-एक परत ले जाकर सभी घरों में डाल दी। अपने-अपने घरों में सोना देखकर लोग खुशी से नाच उठे। चिड़िया लौट तो आई पर थककर मूर्ति पर आ गिरी। कुछ क्षण में उसके प्राण निकल गए।

अगले दिन जब दोनों मंत्री वहाँ से गुजरे तब उनके साथ राजा भी थे। प्रतिमा को देखकर राजा बोले, “यह प्रतिमा कितनी भद्दी लग रही है।"

दोनों मंत्री बोले, “आपने ठीक ही कहा। यह तो राजकुमार नहीं, किसी भिखारी की प्रतिमा लग रही है। इसपर तो कोई पक्षी भी मरा पड़ा है। हम कल ही इसे हटवा देंगे।"


Philanthropic Prince Moral Stories



Greece is the capital of the state - Athens. There was a golden statue in the middle of Athens. Diamond-pearl and gold-silver were inlaid on that statue. This statue was of the prince of Greece.


One day two Greek ministers were passing by. Looking at the statue, one said to the other, "Truly no one has seen such a beautiful statue anywhere else." The artist has made it so lively, as if it would just speak. "


Pratima smiled after listening to them. Then his mother came out in front holding a child's finger. The child was crying. Mother said, "Just look at that statue. How is the prince smiling? You too should always keep smiling like this. But you weep over talk. "


In the meantime a bird came flying from somewhere and sat on that statue. She was tired of flying. The bird was still languishing when the drops started falling from the sky. The bird said, "Hey! I had come here to rest, but there is no place to cover my head here. What is the use of an idol that cannot save anyone from getting wet. "


Hearing this, the statue said, “There is some space between my two legs. You sit there. "



The bird sat there and survived by getting wet. At night the prince told, "I was the prince here. I always helped everyone. I enjoyed helping others. I no longer live. Nobody can work for themselves even if they want to. Will you help me?"


The bird said - "What's your job?"


The prince said, "Bird, bird! You go to the palace! There are servants' rooms near the palace. There is also a small room among them. There is a sick boy distraught with hunger and thirst. His mother is very poor. He has nothing to feed her. There is no money for medicine. You take some diamonds out of my eyes and give them. "


Chidiya said, "No, no! I will never go for that boy. When I was crossing the river last year, that devil stoned me. "


Rajkumar became sad after hearing Chidiya's talk. Chidiya agreed to her, seeing the prince unhappy. He scrapped his beak and took out some diamonds. Flying away she went to the palace and they dropped the diamond in that small room of the servant. The woman was delighted to find glowing diamonds in her room and went out to get medicine and food for her son.


The bird returned. On the way, he saw a village. There was a lot of poverty. He came and told the prince about the condition of the village. Rajkumar said, “My clothes are made of layers of gold. Take these layers and put them in the village houses. The poor thing will eat for a few days. "


The bird took one layer of gold and put it in all the houses. People danced happily after seeing them sleeping in their homes. The bird came back but tired and fell on the idol. He died in a few moments.


The next day when the two ministers passed by, the king was also with them. Seeing the statue, the king said, "This image looks so ugly."



Both ministers said, "You are right. It is not a prince, but a beggar's statue. Some bird is also dead on this. We will get it removed tomorrow. "


इन्हें भी पढ़े

Post a Comment

Previous Post Next Post