ईमानदार लकड़हारा


Hindi Kahaniya :  हिंदी कहानियां – ईमानदार लकड़हारा

एक गाँव में एक लकड़हारा रहता था। वह बहुत परिश्रमी था। वह ईमानदार भी था। एक बार लकड़हारा नदी के किनारे पहुँचा। वहाँ वह एक पेड से लकड़ी काटने लगा। लकड़ी काटते-काटते उसकी कुल्हाड़ी हाथ से छूटकर नदी में जा गिरी। लकड़हारा उदास हो गया। 


पेड़ से उतरकर वह नदी के किनारे बैठ गया। अचानक एक जलपरी नदी के पानी से बाहर निकली। उसने लकड़हारे से उदासी का कारण पूछा। लकड़हारे ने बताया, “मेरी कुल्हाड़ी नदी में गिर गई है।"

ईमानदार लकड़हारा

जलपरी बोली, “घबराओ नहीं! मैं तुम्हारी कुल्हाड़ी अभी निकाल लाती हूँ।' यह कहकर उसने पानी में डुबकी लगाई। जब वह पानी से बाहर निकली तब उसके हाथ में सोने की एक कुल्हाड़ी थी। जलपरी वह कुल्हाड़ी लकड़हारे को देने लगी। लकड़हारा उदास होकर बोला, “यह मेरी कुल्हाड़ी नहीं है।"

दुखी मत हो, मैं फिर से प्रयास करती हूँ।" यह कहकर जलपरी ने फिर नदी में डुबकी लगाई। इस बार पानी से बाहर निकलने पर उसके हाथ में चाँदी की कुल्हाड़ी थी। चाँदी की कुल्हाड़ी देखकर लकड़हारा और अधिक उदास हो गया और कहने लगा, “यह कुल्हाड़ी भी मेरी नहीं है।

जलपरी बोली, “अच्छा रुको! इस बार मैं तुम्हारी कुल्हाड़ी ढूँढकर लाती हूँ।"

इस बार जलपरी लोहे की कुल्हाड़ी ले आई। अपनी कुल्हाड़ी देखकर लकडहार प्रसन्न हो गया और बोला, “हाँ, यही मेरी कुल्हाड़ी है।"

जलपरी ने कहा, “तुम बहुत ईमानदार हो! तुम लालची भी नहीं हो। अतः तम सोने और चाँदी की कुल्हाड़ियाँ भी रख लो। यह तुम्हारा इनाम है।" इसके बाद जलपरी ओझल हो गई। 

लकड़हारा प्रसन्नतापूर्वक तीनों कुल्हाड़ियाँ लेकर अपने घर वापस आ गया। बच्चो! लकड़हारे को उसकी ईमानदारी का इनाम मिला। हमें भी ईमानदार बनना चाहिए। हमें कभी भी लालच नहीं करना चाहिए।

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