Hindi Kahaniya :  हिंदी कहानियां – पौधा बोला


नन्हे पौधे की कहानी | हिंदी  कहानी  | Moral Stories in Hindi | Hindi Kahaniya

चुनमुन दादा जी की उँगली पकड़े पार्क की ओर जा रहा था। दोनों रोज़ सुबह सैर करने जाते थे। पार्क में चुनमुन को एक नन्हा पौधा दिखाई दिया। उसे लगा जैसे पौधा अपने पत्ते हिला-हिलाकर उसका स्वागत कर रहा हो।


चुनमुन ने पौधे से कहा - "नन्हे पौधे पहले तुम्हे यहाँ पर नहीं देखा तुम यहाँ पर कब आए!

अरे, यह क्या? पौधा बोल पड़ा, “हाँ, पहले मैं बीज के अंदर था। माली काका ने मेरे बीज को धरती के अंदर गाड़ दिया। इस धरती की गोद में मेरा जन्म हुआ।"

चुनमुन ने पूछा - "तुम धरती के अंदर इतने समय से थे तुम्हे डर नहीं लग रहा था ?"

"मैं तो बिलकुल ही घबरा गया था पर माली काका मुझे बराबर देखने आते थे और पानी भी देते थे।" पौधे ने बताया। 

फिर? फिर क्या हुआ?" चुनमुन ने पूछा।

कुछ देर रुककर पौधा फिर बोला, “धीरे-धीरे मेरे अंदर अंकुर फूटने लगे। अंकुर के रूप में मैं मिट्टी से बाहर आया। यह देखकर माली बहुत खुश हुआ। अब मुझे हवा और प्रकाश भी मिलने लगा था। इससे धीरे-धीरे मैं बड़ा होने लगा । मुझमें पत्ते निकलने लगे।"

Hindi Kahaniya :  हिंदी कहानियां – पौधा बोला

"तुम्हारे पत्ते कितने सुंदर हैं?" चुनमुन ने प्यार से उसके पत्ते सहलाए।

प्रशंसा सुनकर पौधा खुश हो गया। फिर अचानक उदास होकर बोला, “कछ बच्चे बहुत ही शरारती होते हैं। बच्चों के साथ खेलना मुझे अच्छा लगता है पर जब वे मेरे पत्ते तोड़ते हैं तो मुझे बड़ा दर्द होता है।"

चुनमुन ने पूछा - मैं तुम्हारे पत्ते कभी भी नहीं तोडूंगा । क्या तुम मुझसे दोस्ती करना पसंद करोगे?”

हाँ-हाँ, क्यों नहीं! कुछ दिनों में मुझमें फूल और फल भी निकलने लगेंगे। बड़ा होकर मैं पेड़ बन जाऊँगा।पौधे ने कहा।

अचानक चुनमुन को कुछ याद आया। उसने पूछा, “तुम्हारे कोई दादा जी नहीं हैं, मेरे दादा जी जैसे?"

मेरे भी दादा जी थे। उनके फल बहुत मीठे थे और उनकी छाँव में लोग आराम करते थे।पौधा बोला।

चुनमुन बोल पड़ा, "मैं भी अपने दादा जी की गोद में आराम करता हूँ।"
"और जानते हो! लोग अपनी साँस द्वारा जो अशुद्ध हवा बाहर निकालते हैं, उसे वे अपने अंदर ले लेते थे और उन्हें शुद्ध हवा में बदल देते थे। शुद्ध हवा को ऑक्सीजन कहते हैं। इसके बिना मनुष्य पल भर भी जीवित नहीं रह सकता।" पौधे ने चहकते हुए कहा।

"अच्छा! अब तुम्हारे दादा जी कहाँ हैं?" चुनमुन ने पूछा।

एक दिन, एक आदमी कुल्हाड़ी लेकर आया और उन्हें काट दिया। वे बहुत चिल्लाए कि मुझे मत काटो, मैं तुम्हारा मित्र हूँ। पर वह न माना। मेरे दादा जी तो सबका भला करते थे, फिर उन्हें क्यों मार दिया गया?" पौधा मायूस हो गया। 

चुनमुन ने उसे प्यार से सहलाया और बोला, “तुम घबराओ मत! हम अब यह गलती नहीं होने देंगे। हम पेड़-पौधे लगाएँगे भी और उन्हें कटने भी नहीं देंगे।"


Story of the tiny plant | Moral Stories 


Chunmun was going towards the park holding Dad's finger. Both went for a walk in the morning. In the park, Chunmun saw a small plant. He felt as if the plant was shaking its leaves and welcoming it.


Chunmun said to the plant - "Little plants didn't see you here before when did you come here!"


Hey, what is this? The plant said, "Yes, earlier I was inside the seed. The gardener Kaka buried my seed inside the earth. I was born in the lap of this earth. "


Chunmun asked - "You were inside the earth for so long, you did not feel afraid?"


"I was absolutely terrified, but the gardener Kaka used to come to see me and give me water too." The plant told.


"Again? What happened then? ”Chunmun asked.


After a while, the plant said again, "Slowly, seedlings started growing inside me. I came out of the soil as a seedling. The gardener was very happy to see this. Now I was getting air and light. I slowly grew up with this. The leaves started coming in me. "


"How beautiful are your leaves?" Chunmun fondly rubbed her leaves.


The plant became happy upon hearing the praise. Then suddenly said sadly, "Some children are very naughty. I like to play with the kids, but when they break my leaves, it hurts me. "


Chunmun asked - "I will never break your cards." Would you like to befriend me? "


"sure why not! In a few days, flowers and fruits will also start coming in me. I will grow up to be a tree. " The plant said.


Suddenly Chunmun remembered something. He asked, "You have no grandfather, like my grandfather?"


“My grandfather was also there. His fruits were very sweet and people used to rest in his shade. " The plant said.


Chunmun said, "I too rest in my grandfather's lap."

"And you know! People used to take out the impure air that they take out of their breath, and they converted it into pure air. Pure air is called oxygen. Without it, a human being cannot live for a moment. " The plant said chirping.


"Good! Where is your grandfather now?" Chunmun asked.


"One day, a man brought an ax and cut them. They shouted a lot that don't bite me, I am your friend. But he did not agree. My grandfather used to do good to everyone, then why was he killed? "The plant got depressed.



Chunmun fondly kissed her and said, "Don't you panic!" We will not allow this mistake to happen now. We will also plant trees and will not let them be cut down. "


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