Hindi Kahaniya :  हिंदी कहानियां - सुन्दर कौन

सुन्दर कौन | हिंदी  कहानी  | Moral Stories in Hindi | Hindi Kahaniya


कपिल वन में एक बारहसिंगा रहता था  एक दिन कि बात है  कि वह घूमते घूमते वन में दूर निकल गया  अब उसे प्यास सताने लगी थी 

बारहसिंगा इधर उधर पानी ढूढने लगा  तभी उसे एक सरोवर दिखाई पड़ा  सरोवर  पानी साफ़ पानी से भरा हुआ था  बारहसिंगा वहां पानी पीने लगा  

पानी पीते समय उसने पानी में अपनी परछाई देखी । परछाई में अपनी सींगों को देखकर वह सोचने लगा, कि वह कितना सुन्दर है  मेरी सींग तो बहुत ही सुन्दर है   ये पेड़ कि डालियों कि तरह चारो तरफ फैले हुए हैं  

बारहसिंगा मन ही मन खुश हो रहा था कि उसकी नजर अपने पैरों पर गई  टेढ़ी मेढ़ी टांगे देखी तो वह दुखी हो गया  ‘ये दुबले पतले पांव कितने भद्दे हैं । सुन्दर सींगों की शोभा भी ये कम कर रहे हैं!’ उसने सोचा    

कुछ दिन बीत गए  बारहसिंगा एक मैदान में घुसकर खास खा रहा था  उसे कुछ खटका लगा  उसने देखा कि जंगल के कई पशु इधर उधर भाग रहे थे  उन्हें देखकर बारहसिंगा भी भागने लगा । हुआ यह था कि एक शिकारी जंगले में घुस आया था  सब जानवर उस शिकारी से बचाकर भाग रहे थे 

बारहसिंगा भागता-भागता दूर निकल गया । अचानक घनी झाड़ियो में उसके सींग उलझ गए  बारहसिंगा ज़ोर लगाने लगा पर उसके सींग तो उलझते ही जा रहे थे । उसके सुन्दर सींग झाड़ियो में फँस गए थे कि निकलना कठिन था  बारहसिंगा दर के मारे काँपने लगा  उसमें मन में सोचा ‘मेरे सुन्दर सींग कहीं मेरी मृत्यु का कारण न बन जाये 

बारहसिंगा घबराहट में पैर पटकने लगा । उसके मजबूत पैरों से सींग झाड़ी से छुट गए  बारहसिंगा सिर पर पैर रखकर भागा  अब वह शिकारी की पहुँच से बहार था  

बारहसिंगा ने लम्बी साँस ली  उसने अपने पैरों का धन्यवाद किया । वह बुदबुदाया, “सुन्दर वही है जो समय पर काम आए ।" 

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